शिमला।। विश्व धरोहर शिमला-कालका रेल मार्ग पर चलने वाली टॉय ट्रेन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी है। इस रेल ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनों में सफर करना पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई है। चार्टर्ड ट्रेन के अलावा रेल मोटर कार से सफर करना भी यात्रियों को बेहद पसंद आ रहा है। इस विंटर सीजन में कई पर्यटकों ने टॉय ट्रेन से कालका व शिमला के बीच चलने वाली ट्रेन में सफर कर पलों को यादगार बनाया।

शिमला आने वाले पर्यटकों की चाह होती है कि वे एक बार जरूर इस टॉय ट्रेन में सफर करें और रेलवे प्रबंधन ने यात्रियों की सुविधा और उन्हें और आकर्षित करने के लिए विस्टाडोम कोच वाली ट्रेन के अलावा झरोखा कोच वाली ट्रेन सहित चार्टर्ड ट्रेन भी शुरू की है। बीते कुछ दिनों में चार्टर्ड बुकिंग के प्रति पर्यटकों में रुझान अधिक बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि कालका-शिमला रेलवे से सफर का अपना ही एक मजा है। जब घुमावदार मोड़ से प्रकृति व पहाड़ियों को नजदीक से निहारने का मौका मिलता है तो पर्यटक उन्हें यादगार लम्हों में समेटने में लगते हैं। बीते दिनों पूर्व इस मार्ग पर चलनी वाली सभी ट्रेनें फुल चल रही थीं। इसके अलावा चार्टर्ड ट्रेन की बुकिंग भी हुई।
गिनीज बुक ऑफ रेल फैक्ट्स एंड फीट ने कालका-शिमला को भारत में छोटी लाइन की महानतम इंजीनिरिंग के रूप में रिकॉर्ड किया है। 103 सुरंगें वर्तमान में जो 102 है और 800 पुलों का 3 साल में निर्माण करना और वह भी ऊबड़-खाबड़ और प्रतिकूल भूमि में कोई आसान कार्य नहीं था। 95.68 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक लाइन को यातायात के लिए 9 नवम्बर, 1903 को खोला गया था। 10 जुलाई, 2008 को इसे यूनैस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया और भारत की पर्वतीय रेलवे के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया था।
