प्रदेश का जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ आमरण अनशन पर जाने की तैयारी में है। संघ का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार जेबीटी बैचवाइज भर्ती की वेटिंग लिस्ट जारी करती है, तो उन्हें अब मजबूर होकर आमरण अनशन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
जेबीटी प्रशिक्षुओं की मानें, तो प्रदेश सरकार ने हमीरपुर को छोडक़र बाकि सभी जिलों के रिजल्ट बीते दिनों निकाले हैं। मार्च में जेबीटी के दो सौ पदों के लिए काउंसिलिंग का आयोजन हुआ था।
गौर हो कि जेबीटी बैचवाइज भर्ती में बीएड को शामिल करने पर जेबीटी प्रशिक्षुओं ने काफी रोष दिखाया था, परंतु अब लगभग सभी जिलों के परिणाम निकाल दिए गए हैं, जिसमें सिर्फ बीएड वालों को ही शामिल किया गया है।
जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के प्रदेश महासचिव जगदीश परयाल ने कहा कि जेबीटी बैचवाइज भर्ती में बीएड को शामिल करने से जेबीटी के हकों को छीना गया है। उन्होंने कहा कि जेबीटी प्रशिक्षुओं ने समय समय इसके लिए आवाज भी उठाई और सरकार से मांग की थी कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, बीएड को जेबीटी में शामिल न किया जाए। जगदीश ने कहा कि बीएड के पास जेबीटी टेट पास सर्टिफिकेट नहीं है।
जेबीटी बेरोजगार संघ से मुख्यमंत्री से अपील की है कि जेबीटी प्रशिक्षुओं को सरकार से बहुत उम्मीदें थी। पिछले पांच सालों से उनके साथ शोषण को रहा है, इसमें मुख्यमंत्री खुद संज्ञान लें और अगर मांगों को नहीं माना जाता है, तो संघ आमरण अनशन करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
संघ ने कहा कि जिन लोगों को भर्ती में शामिल किया गया है, वे एलिजिबल भी नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद जेबीटी प्रशिक्षुओ ने शिमला में अनशन पर बैठे थे, उस समय मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक किसी भी जिले का परिणाम घोषित न करने का आश्वासन दिया था। उसके बावजूद चंबा का परिणाम निकाला गया, जिसमे सिर्फ बीएड वालों को शामिल किया गया है।
अगर शिक्षा विभाग नहीं मानता है तो जेबीटी प्रशिक्षु शिमला में फिर से अनशन पर बैठेंगे। उनका कहना है कि कक्षा पहली से पांचवीं तक सिर्फ जेबीटी का ही हक है, सरकार इसके लिए पूरे प्रदेश भर में 28 सरकारी व प्राइवेट संस्थानों में प्रशिक्षण करवा रही है, उसके बावजूद बीएड को शामिल करना गलत है।
