इस वर्ष मानसून के दौरान लगातार भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण हिमाचल प्रदेश के लोगों को प्राकृतिक संकट और आपदा का सामना करना पड़ा।
• प्रदेश में जुलाई माह में सामान्य से 71 प्रतिशत तथा अगस्त माह में 29 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। लगभग तीन माह तक आपदा की परिघटनाओं में मानव क्रियाकलाप अवरुद्ध हुए और जन धन की भारी हानि हुई।
• राज्य में 498 लोग काल का ग्रास बन गए और 3500 घर पूर्णतया व 13 हजार घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। प्रदेश में किसानों व बागवानों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
• संकट की इस घड़ी में प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में पहुंच कर प्रभावितों का दुःख-दर्द साझा किया और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च अधिमान देते हुए यथासंभव सहायता प्रदान की।
• प्रदेश सरकार ने 18 अगस्त, 2023 को पूरे प्रदेश को प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया। सरकार ने इस आपदा का पूर्ण आकलन किया और यह पाया कि इस त्रासदी के कारण राज्य के पुनरुत्थान और लोगों के पुनर्वास यानि प्रभावितों को फिर से बसाने के लिए बड़े स्तर पर कदम उठाने की आवश्यकता है।
• इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने विशेष राहत पैकेज तैयार किया है। इस पैकेज में राज्य में आपदा प्रभावितों को हर संभव मदद प्रदान करने के लिए अनेक प्रावधान किए हैं।
• यह पैकेज भारतवर्ष में किसी भी राज्य में आपदा के बाद लोगों को राहत प्रदान करने के लिए उठाया गया सबसे बड़ा कदम है जिसमें समाज में हर वर्ग के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है।
• विशेष राहत पैकेज के तहत मुआवजा राशि में 25 गुणा तक की बढ़ौतरी की गई है। आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार कुल मिलाकर 4 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जिसमें से 750 करोड़ रुपये विशेष राहत पैकेज तथा 1000 करोड़ रुपये मनरेगा के तहत व्यय किये जायेंगे। राज्य बजट से एक हजार 850 करोड़ रुपये जारी। लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग को एक हजार 21 करोड़ रुपये।
• एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के अंतर्गत 750 करोड़ रुपये जारी। अपरोक्ष लाभों पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
• इस विशेष राहत पैकेज के तहत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घर के लिए मिलने वाले एक लाख 30 हजार रुपये के मुआवजे को साढ़े पांच गुणा बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। राज्य में आपदा के कारण 3500 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त कच्चे घर को आंशिक नुकसान पर प्रदत 4000 रुपये मुआवजे को 25 गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये जबकि पक्के घर को आंशिक नुकसान पर मिलने वाली 6500 रुपये की धनराशि को साढ़े 15 गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है।
• दुकान या ढाबे को नुकसान होने पर मिलने वाले 25000 रुपये के मुआवजे को चार गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। इसके साथ ही गौशाला को नुकसान पर 3000 रुपये के स्थान पर राज्य सरकार 50 हजार रुपये आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। आपदा के कारण राज्य में 670 दुकानों व ढाबों के साथ – साथ 8300 गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। किरायेदार के सामान को नुकसान होने पर मिलने वाले 2500 रुपये के मुआवजे में 20 गुणा वृद्धि करते हुए राज्य सरकार उन्हें 50 हजार रुपये की मदद देगी। ऐसे प्रभावितों की संख्या एक हजार 909 है।
• इस मॉनसून सीजन में 96 गाय व भैंसों, 16 घोड़े व गधों तथा 6 बछड़ों की मृत्यु हुई है जिनके लिए सहायता राशि बढ़ाकर 55 हजार रुपये की गई है। पहले इनके लिए क्रमशः 37500 रुपये, 34000 रुपये और 20000 रुपये मिलते थे। भेड़ या बकरी की मृत्यु पर मिलने वाले 4000 रुपये मुआवजे को भी बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया गया है।
• आपदा में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंची है। कृषि एवं बागवानी योग्य भूमि को नुकसान पर पूर्व में प्रदत 3615 रुपये प्रति बीघा मुआवजे को बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया है। फसल के नुकसान पर मिलने वाले 500 रुपये प्रति बीघा मुआवजे को आठ गुणा बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही कृषि व बागवानी भूमि से सिल्ट निकालने के लिए आर्थिक सहायता 1384.61 रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 5000 रुपये की गई है। आपदा के कारण हुई तबाही से प्रदेश में 37 हज़ार 899 बीघा कृषि भूमि, 17 हजार 947 बीघा बागवानी भूमि को नुकसान हुआ है जबकि 26 हज़ार 490 बीघा पर फसल को क्षति हुई है। वहीं 42 बीघा में सिल्ट के कारण कृषि व बागवानी योग्य भूमि को नुकसान पहुंचा है।
• आपदा से पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा भूमि प्रदान करेगी। विशेष पैकेज के तहत इसमें ऐसे परिवार पात्र होंगे जिनकी अपनी रहने योग्य भूमि नहीं बची है तथा इसमें आय की कोई सीमा नहीं होगी। इसके अतिरिक्त जो भूमिहीन व्यक्ति लम्बे समय सेप्रदेश में रह रहे है तथा जिनकी हिमाचल में रहने की स्थायी इच्छा है और आपदा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें भी इस पैकेज के तहत भूमि प्रदान की जाएगी।
• प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में सफाई कर्मचारी या प्रवासी मजदूर जो निम्न आय वर्ग से संबंध रखते है तथा इस आपदा से उनकी रिहायश क्षतिग्रस्त हुई है, उनके पुनर्वास के लिए संबंधित उपायुक्त भूमि का चयन कर उन्हें संबंधित नगर निगम के सहयोग से पुनर्स्थापित करेंगे।
• जिनके घर आपदा से पूर्णतया नष्ट हो चुके हैं तथा नया घर बनायेंगे, ऐसे परिवारों को बिजली व पानी के कनेक्शन की सुविधा का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इन परिवारों को मकान बनाने के लिए सीमेंट भी सरकारी दरों पर प्रदान किया जायेगा।
• देश में प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान का प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। जहां एक ओर विभिन्न जिलों में आपदा के कारण कुछ दिनों के लिए शिक्षण संस्थान बंद रहे, वहीं कुछ बच्चे उनके घरों और जमीनों के नुकसान के कारण स्कूल नहीं जा पाये। सभी शिक्षण संस्थान जितने दिन बंद रहे उतने दिन बच्चों को अतिरिक्त कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई करवाई जायेगी। इससे बच्चों की पढ़ाई में आये व्यवधान से हुई क्षति को पूरा किया जाएगा।
• प्रदेश सरकार आपदा से प्रभावित परिवार जो कि राहत शिविरों में रह रहे हैं, उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में किराये के मकान में रहने के लिए 5 हज़ार रुपये और शहरी क्षेत्रों में 10 हजार रुपये किराये के रूप में अगले 6 महीनों तक के लिए प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त इन परिवारों को रसोई गैस, 20 किलोग्राम आटा, 15 किलोग्राम चावल, 3 किलोग्राम दाल, 2 किलोग्राम चीनी व 2 लीटर तेल भी आगामी 31 मार्च, 2024 तक सरकार द्वारा निःशुल्क प्रदान किया जाएगा।• विधायक क्षेत्र विकास निधि योजना के अन्तर्गत आपदा प्रभावित परिवारों के घरों के लिए रिटेनिंग वॉल तथा नालों के तटीयकरण का प्रावधान किया गया है। इस निधि के अन्तर्गत इस वित्तीय वर्ष में प्रति विधानसभा क्षेत्र के लिए 2 करोड़ 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त 31 मार्च, 2023 तक सभी जिलों में एसडीपी के अन्तर्गत जो भी अनस्पेंट राशि उपलब्ध होगी, उसे आपदा प्रभावित परिवारों के घरों के लिए रिटेनिंग वॉल तथा नालों के तटीयकरण के लिए खर्च करने की अनुमति दी जा रही है।
• प्रदेश सरकार द्वारा 12 जुलाई, 2023 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदा में ग्रामीण क्षेत्रों में जिन परिसम्पत्तियों का नुकसान हुआ है, उनको मनरेगा के अन्तर्गत मदद प्रदान की जाएगी। सरकार द्वारा ऐसे सभी कार्यों की उपायुक्त एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा) से प्राप्त स्वीकृति के उपरांत मनरेगा दिशा-निर्देशों के अनुसार व्यक्तिगत लाभार्थी के लिए भूमि विकास से संबंधित व्यक्तिगत कार्यों के लिए एक लाख रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी। अभी तक एक लाख 40 हज़ार 521 कार्य स्वीकृत किये जा चुके हैं तथा इन पर अनुमानित 1085.05 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।
• जिन लोगों ने ऋण लिया है और आपदा के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हुई है, ऐसे परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए उनके ऋण का पुनर्निर्धारण किया जा रहा है। राज्य के सभी बैंकों को ऋण पुनर्निर्धारण के माध्यम से राहत उपाय प्रदान करने के निर्देश जारी किए गए हैं। मौजूदा ऋणों के प्रकार में दुकान, एमएसएमई, खुदरा और अन्य ऋण (कृषि और संबद्ध गतिविधियों के अग्रिमों को छोड़कर) शामिल है। प्राकृतिक आपदा की तारीख 24 जून, 2023 होगी और इसलिए राहत उपायों के कार्यान्वयन के लिए मूल्यांकनतिथि भी यही रहेगी। पुनर्वास उपाय केवल उन खातों पर लागू होंगे जो 24 जून, 2023 तक अतिदेय नहीं थे।
• इस राहत पैकेज के तहत 7 जुलाई, 2023 से 30 सितम्बर, 2023 तक आपदा से प्रभावित लोगों को लाभान्वित किया जाएगा।
• राज्य सरकार इस त्रासदी से निपटने के लिए चौबीसों घंटे कार्य कर रही है। सरकार, प्रदेशवासियों को हर संभव सहायता प्रदान करने और इस आपदा से उबर कर राज्य को एक विकसित राज्य बनाने के अपने संकल्प के साथ दृढ़ता से आगे बढ़ रही है।
