श्रीखण्ड टाइम्स, शिमला।
सुन्नी तहसील में सरकार गुम, कुर्सियाँ खाली जनता परेशान : रवि मेहता
शिमला : शिमला ग्रामीण की तहसील सुन्नी आज भी अधिकारियों और कर्मचारियों की किल्लत से जूझ रही है, जबकि सरकार की ओर से स्थिति सुधारने की कोई गंभीर पहल दिखाई नहीं देती। भाजपा प्रत्याशी रवि मेहता ने कहा कि उद्घाटन, शिलान्यास और बोर्ड लगाने तक ही सरकार का काम सीमित रह गया है परंतु जनता को मिलने वाली ज़रूरी सेवाएँ लगातार बाधित हो रही हैं।
भाजपा नेता रवि मेहता ने कहा कि ब्लॉक बसंतपुर कार्यालय वर्षों से अधूरे स्टाफ के सहारे चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ की कमी, शिक्षा विभाग में शिक्षकों की अनुपस्थिति, पुलिस विभाग में कर्मियों की कमी और राजस्व विभाग में अधिकारियों की लंबी अनुपस्थिति ने पूरे क्षेत्र की कार्यप्रणाली बाधित कर रखी है। ऊर्जा और सिंचाई विभागों में फाइलें महीनों से पेंडिंग पड़ी हैं, जिसके कारण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि 2013 से लेकर आज तक भवन तो बने, शिलान्यास और उद्घाटन होते रहे, परंतु कार्यालयों की वास्तविक तस्वीर आज भी खाली कमरों और ताले लगे दरवाज़ों की है। सुन्नी, धामी, खटनोल, पीपलीधार, देवला और गड़काहन—हर क्षेत्र की जनता यह दर्द साझा कर रही है कि काम करवाने जाएँ तो अधिकारी नहीं, फाइल पूछें तो स्टाफ नहीं, और समस्या उठाएँ तो सरकार का कोई जवाब नहीं।
मेहता ने कहा कि सरकार से अब सीधा सवाल यह है कि शिमला ग्रामीण की जनता से किए गए वादे कहाँ गए? खाली पड़े दफ्तरों का जिम्मेदार कौन है? और कब तक जनता को अपनी बुनियादी सेवाओं के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा? यदि सरकार जनता की समस्याएँ सुनने को ही तैयार नहीं है, तो लोगों को अपनी आवाज़ खुद बुलंद करनी होगी।
स्थानीय जनता का दर्द साफ है हमने सेवाओं के लिए वोट दिया था, खाली कुर्सियाँ देखने के लिए नहीं। अब सरकार को स्पष्ट और ठोस जवाब देना होगा कि सुन्नी तहसील को उसका अधिकार आखिर कब मिलेगा।
