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श्रीखण्ड टाइम्स, शिमला।

सीबीएसई स्कूलों पर कांग्रेस सरकार की नीयत और नीति दोनों फेल, मुख्यमंत्री बताएं बच्चों का भविष्य कब तक फाइलों में कैद रहेगा? : राकेश जमवाल

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, शिक्षक न मिलने के कारण छात्र सीबीएसई स्कूलों से पलायन को मजबूर

स्टांप मंत्री’ बनकर रह गए कांग्रेस सरकार के मंत्री

मित्र नीति’ से चल रही सरकार, कैबिनेट सब-कमेटी केवल आईवॉश
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धर्मशाला : भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार की कार्यशैली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कांग्रेस सरकार घोषणाएं करने में सबसे आगे और उन्हें धरातल पर उतारने में सबसे पीछे है। स्वतंत्रता दिवस के मंच से सरकारी स्कूलों में सीबीएसई लागू करने की बड़ी घोषणा कर प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों को सपने दिखाए गए, लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश का एक भी सरकारी सीबीएसई स्कूल शुरू नहीं हो पाया। सरकार की इस देरी के कारण अनेक विद्यार्थी निजी सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश लेने या दूसरे राज्यों के स्कूलों का रुख करने को मजबूर हो गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है और कई छात्रों का शैक्षणिक भविष्य असमंजस में फंस गया है। अब स्वयं शिक्षा मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि मामला अभी भी निर्णय और नियुक्तियों के बीच अटका हुआ है।

राकेश जमवाल ने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर मुख्यमंत्री अपने पिटारे से सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों की फाइल कब निकालेंगे? मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के बच्चों के भविष्य का विषय है। बच्चों की शिक्षा, उनके भविष्य और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक खींचतान और सत्ता के अहंकार की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की लापरवाही का सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। सीबीएसई स्कूलों की घोषणा के बाद भी आज तक उन्हें शुरू नहीं किया गया। बच्चे असमंजस में हैं, अभिभावक परेशान हैं और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अनिश्चितता का शिकार है। सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि शिक्षक अभी तक तैनात नहीं हो पाए हैं। सरकार को समझना चाहिए कि घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था नहीं चलती, बल्कि समय पर निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन से चलती है। कांग्रेस सरकार की निष्क्रियता सीधे-सीधे प्रदेश के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री सार्वजनिक रूप से यह कह रहे हैं कि विभाग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है और अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री को लेना है। इससे साफ है कि प्रदेश के मंत्री अपने विवेक से कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं। यदि मुख्यमंत्री को अपने ही मंत्रियों पर विश्वास नहीं है तो फिर उन्हें मंत्री बनाने का औचित्य क्या है? क्या मंत्रिमंडल केवल औपचारिकता निभाने के लिए बनाया गया है? कांग्रेस सरकार में मंत्री केवल ‘स्टांप मंत्री’ बनकर रह गए हैं, जबकि हर निर्णय पर मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत मुहर लगना अनिवार्य बना दिया गया है।

राकेश जमवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार की अंदरूनी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि मंत्री भी स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री यदि निर्णय लेने में सक्षम होते तो उन्हें बार-बार यह नहीं कहना पड़ता कि मुख्यमंत्री फैसला करेंगे। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि सरकार में विभागों का नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का शासन चल रहा है और वही अंतिम निर्णयकर्ता है।

भाजपा मुख्य प्रवक्ता ने सीबीएसई को लेकर गठित कैबिनेट सब-कमेटी पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चार मंत्रियों की इस महत्वपूर्ण समिति की बैठक में केवल दो मंत्री ही उपस्थित हुए, जबकि राजेश धर्माणी और जगत सिंह नेगी ने शामिल होना भी उचित नहीं समझा। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनकी उदासीनता दर्शाता है। आखिर इसे क्या माना जाए—शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय के प्रति लापरवाही या फिर मुख्यमंत्री की तानाशाही कार्यशैली से उनकी नाराजगी?

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि मंत्रियों को भी पता है कि चाहे जितनी बैठकें कर ली जाएं और जितनी रिपोर्टें तैयार कर ली जाएं, अंतिम निर्णय किसी समिति की सिफारिशों के आधार पर नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की ‘मित्र नीति’ के अनुसार ही होगा। इसलिए यह पूरी कवायद केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास बनकर रह गई है। सरकार समितियां बनाकर समय निकाल रही है, जबकि विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

राकेश जमवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार बार-बार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का बहाना बना रही है, जबकि स्वयं शिक्षा मंत्री स्वीकार कर चुके हैं कि कई विषयों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने भी विभाग की प्रक्रिया को सही ठहराया है। यदि न्यायालय से भी सरकार को राहत मिल चुकी है तो फिर नियुक्तियां रोकने का कारण क्या है? आखिर किसके दबाव में सरकार योग्य और मेरिट के आधार पर चयनित शिक्षकों को नियुक्ति देने से बच रही है?

उन्होंने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि मेरिट के आधार पर चयनित शिक्षकों को तत्काल नियुक्ति देकर चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई स्कूल शुरू किए जाएं। प्रदेश के बच्चों का भविष्य मुख्यमंत्री की फाइलों में कैद रहने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा पाने के लिए है। यदि सरकार अब भी निर्णय लेने में असफल रहती है तो भाजपा इस मुद्दे को प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का रूप देने से पीछे नहीं हटेगी।

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