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शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद लोक निर्माण विभाग और उद्योग विभाग ने पीडब्ल्यूडी कांट्रेक्टर्स की जांच के लिए कमेटी का गठन कर लिया है। दोनों विभागों में दो-दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई है और कमेटी ने काम शुरू भी कर दिया है। कमेटी आगामी दो माह के अंतराल में लघु खनिज पदार्थों की सप्लाई और ढुलाई समेत ठेकेदारों के लंबित पड़े बिलों की जांच करेगी। यानी ठेकेदार रेत बजरी कहां से लाए हैं, इसका सोर्स लीगल है या नहीं, इसकी जांच होगी। जांच के बाद कमेटी आला अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपेगी और इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट के सुपुर्द किया जाएगा।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने पांच जनवरी को अपने फैसले में लोक निर्माण विभाग पर सख्त टिप्पणी के साथ डब्ल्यू और एक्स फार्म को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए थे। साथ ही लंबित बिलों की जांच और लघु खनिज (क्रशर) की सप्लाई और ढुलाई के असली स्रोत का पता लगाने की बात कही थी। उच्च न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग और उद्योग विभाग को कमेटी बनाकर दो महीने में जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। इसी कड़ी में अब लोक निर्माण विभाग ने दो अधिकारियों को जांच का जिम्मा सौंपा है। इन अधिकारियों में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अतुल ज्योति गाजटा और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (वर्क) यशपाल वशिष्ठ शामिल हैं। विभाग ने तय अवधि में जांच कार्य को पूरा करने के लिए इन अधिकारियों को एक गाड़ी भी मुहैया करवाई है। यह गाड़ी और चालक नियमित रूप से अब आगामी करीब दो माह तक जांच टीम के साथ ही रहेंगे।उधर, उद्योग विभाग ने भी दो सदस्य जांच समिति बनाई है। भूगर्भ वैज्ञानिक संजीव कुमार और गौरव शर्मा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। हाई कोर्ट ने पांच जनवरी को फैसला दिया था और उसी दिन से आगामी दो माह का समय इस पूरी जांच के लिए निर्धारित किया गया है। यानी अब तक करीब 10 दिन गुजर चुके हैं और आने वाले 50 दिनों में जांच समिति को प्रदेश भर से डाटा जुटाना होगा। ठेकेदारों के लंबित बिल का भुगतान बहुत हद तक इस जांच समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। लोक निर्माण विभाग जांच समिति ने मोर्चा संभाल लिया है। समिति के दोनों जांच अधिकारियों ने संयुक्त रुप से एक पत्र जारी कर नेशनल हार्ई वे के मुख्य अभियंताओं से लघु खनिज की सप्लाई, ढुलाई और ठेकेदारों के लंबित बिल या उन में लगाए गए डब्ल्यू और एक्स फार्म के संबंध में जानकारी मांगी है। यह जानकारी 24 घंटे में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। नेशनल हाईवे के मुख्य अभियंताओं से ई-मेल के माध्यम से यह रिपोर्ट विभाग मुख्यालय शिमला भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुभाशीष पांडा ने जांच समिति के गठन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि तय समय में जांच पूरी होगी।

कैबिनेट में जाएगा रूल्स बदलने का मामला

शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह मामला लगा था। इससे पहले मुख्यमंत्री खुद विभागों के सचिवों और महाधिवक्ता के साथ बैठकें ले चुके हैं। कैबिनेट में चर्चा के बाद तय हुआ है कि अब अगली बैठक में इसे रखा जाएगा। इसमें माइन्स एंड मिनरल रूल्स को बदलने पर फैसला होगा। दूसरी ओर सरकार अन्य कानूनी रास्ते भी देख रही है। इस केस के कारण लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों के करीब 300 करोड़ का भुगतान रुक गया है।

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