शिमला।। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली 108 और 102 एंबुलेंस में कार्यरत कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा पैदा हो गया है। दरअसल प्रदेश में 102 और 108 एंबुलेंस का काम देख रही जीवीके कंपनी का करार खत्म हो गया है। ऐसे में अब नई कंपनी मेडसवान फाउंडेशन ने टेकओवर कर लिया है। नई कंपनी ने पुराने सभी कर्मचारियों के इंटरव्यू लिए है। इंटरव्यू के बाद आधे कर्मचारियों को कंपनी की ओर से ऑफर लैटर जारी कर दिए हैं, जबकि आधे कर्मचारियों को ऑफर लैटर नहीं मिले हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों की नौकरी खतरे में आ गई है।

हिमाचल में राष्ट्रीय एंबुलेंस सर्विस 108 व 102 का जीवीके कंपनी के साथ करार समाप्त हो गया है । अब सरकार ने बिहार की तर्ज पर मेडसवान कंपनी को हिमाचल में एंबुलेंस सेवा को सुचारू रखने का जिम्मा सौंपा है । मेडसवान फाउंडेशन ने शनिवार को गाडिय़ां प्रदेश को सौंप दी हैं । 80 प्रतिशत स्टाफ जो पहले जीवीके में अपनी सेवाएं दे रहा था, इन एंबुलेंस सेवाओं में भी सेवाएं देगा, जबकि 20 प्रतिशत स्टाफ नई कंपनी तय करेगी। बातचीत में 108 के कर्मचारियों ने बताया कि अभी तक सेवाएं जारी रखने को लेकर कोई लैटर नहीं मिला है । उन्होंने बताया कि इतने वर्षों तक 108 में सेवाएं दी लेकिन उन्हें कोई लैटर नहीं दिया है । उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी लंबे समय की सेवाओं को नजरअंदाज न करें और उनकी सेवाओं को भी सुचारू रखा जाए । कर्मचारियों ने सरकार से ये भी आग्रह किया की जीवीके कंपनी उनकी सैलरी व शेष इन्सेन्टिव अदा करे। वहीं, मेडसवान कंपनी की और से एंबुलेंसों का ऑडिट अधिकारियों ने बताया कि गाडिय़ों की हालत खस्ता है । वह ऑडिट कर रहे हैं, स्टाफ को उसी तरह रखा जाएगा । शनिवार शाम आठ बजे से 108 व 102 सुचारू रूप से चलेगी ।
शिमला और किन्नौर की एंबुलेंस ढली में खड़ी
शिमला और किन्नौर जिला में चलने वाले सभी 108 और 102 एंबुुलेंस को शिमला के संजौली व ढली बाइपास में खड़ा कर दिया है। यहां पर करीब 90 एबुंलेंस खड़ी है। इन एंबुलेंस को नई कंपनी को हैंडओवर करने का काम चल रहा है। एंबुलेंस कैंडओवर होने से पहले कंपनी जांच कर रही है कि किस एंबुलेंस में किस उपकरण की जरूरत है।
