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पदोन्नति के माध्यम से कॉलेज के प्राचार्य बनने के लिए अब रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार के बयान पर सुनील कुमार और अन्य की याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता की गुहार को सरकार ने मान लिया है।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 25 फरवरी 2023 को सरकार ने निर्णय लिया है कि पुराने पदों को पुराने नियमों के तहत ही पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा।

पदोन्नति के माध्यम से कॉलेज का प्राचार्य बनने के लिए सरकार ने 27 फरवरी 2020 को भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाए थे। इसके अनुसार सहायक प्रोफेसर वेतन बैंड चार में होना चाहिए। न्यूनतम 20 वर्ष की नियमित सेवा या नियमित तदर्थ सेवा के साथ नियमित सेवा होनी चाहिए।

श्रेणी एक और दो के तहत न्यूनतम कुल औसत वार्षिक अंक प्रति वर्ष 100 होना चाहिए। कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत एपीआई के न्यूनतम बिंदु मानदंड श्रेणी तीन में 20 प्रति वर्ष होना चाहिए और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कम से कम 55 फीसदी अंकों के साथ सनात्कोत्तर डिग्री होनी चाहिए।

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