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पिछले करीब 20 वर्षों से कम्प्यूटर अध्यापक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने कम्प्यूटर अध्यापकों के लिए नीति नहीं बनाई है। केवल आश्वासन देकर वोट लेने का काम किया है । यह बात कम्प्यूटर अध्यापक शिक्षक संघ हमीरपुर के अध्यक्ष अशोक रांगड़ा, संजीव कटोच कांगड़ा, रमेश चंद मंडी, रवि कुमार चंबा, धनवीर सिरमौर हरदेव ऊना व बिलासपुर जिला अध्यक्ष अंजू शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि इन दिनों प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के बारे में नीति बनाने की बात कर रही है, लेकिन उसमें भी फैसला नहीं ले रही है। हर बार फैसले को टाला जा रहा है। राज्य के सरकारी स्कूलों में 1354 कम्प्यूटर शिक्षक शिक्षा दे रहे हैं तथा समस्त शिक्षक आर एंड पी नियमों का अनुसरण करते हैं। इनमें से 90 प्रतिशत कम्प्यूटर शिक्षक 45 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं ।जब उक्त कम्प्यूटर शिक्षक नौकरी पर लगे थे तो उनका वेतन मात्र 2400 रुपए था और 20 सालों के बाद 13000 तक पहुंचा है। अब भी प्रदेश सरकार वेतन बढ़ाने तक ही पहुंची है । उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर सरकार आउटसोर्स पर वेतन 18000 से 20000 रुपए तक देती है तब भी 20 वर्षों के बाद क्या मिला। कम्प्यूटर शिक्षक इतने कम वेतन पर बच्चों की पढ़ाई के साथ परिवार का भ्रण पोषण भी नहीं कर पा रहे हैं तथा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की कि कम्प्यूटर शिक्षकों को शिक्षा विभाग में समायोजित किया जाए ताकि प्रदेश के कम्प्यूटर शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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