शिमला।आईजीएमसी में रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि आईजीएमसी प्रशासन ने यहां मरीजों की दिक्कतों के मद्देनजर वरिष्ठ चिकित्सकों की ड्यूटियां सुनिश्चित बनाई हुई है, लेकिन प्रतिदिन करीब 2500 से तीन हजार ओपीडी वाले आईजीएमसी में चिकित्सकों की कमी के कारण यहां मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। हालांकि आईजीएमसी प्रशासन ने यहां आपातकालीन परिस्थितियों वाले मरीजों को प्राथमिकता देने को कहा है, ताकि मरीज उपचार के अभाव में न रह सके। नीट-पीजी की कांउसिलिंग की तिथि आगे बढ़ाने के कारण पांच महीनों से नए डाक्टरों की तैनाती अस्पताल में न होने के कारण रेजिडेंट डाक्टरों की यह हड़ताल है, जिसके कारण आईजीएमसी के 300 रेजिडेंट डाक्टर बुधवार को पूरे दिन हड़ताल पर रहे, जबकि मंगलवार को उन्होंने दो घंटे अपनी सेवाएं नहीं दी थी। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातकोत्तर-2021 की काउंसिलिंग में देरी को लेकर रेजिडेंट डाक्टरों की देशव्यापी हड़ताल के तहत प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज के रेजिडेंट डाक्टर बुधवार को पूरे दिन की हड़ताल पर रहे, जिसके कारण प्रदेशभर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आईजीएमसी में इलाज को पहुंचे लोगों को झेलनी पड़ रही दिक्कतें; सीनियर डाक्टर्स ने संभाली ओपीडी, सिर्फ एमर्जेंसी में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधा।
आईजीएमसी में मरीजों की लंबी कतारें देखी गई। वार्डों में न तो सुबह मरीजों की जांच को लेकर डाक्टरों का राउंड हुआ और न ही ओपीडी में समय पर उपचार। हालांकि आईजीएमसी की ओपीडी में वरिष्ठ डाक्टर मरीजों को देख रहे है। रेजिडेंट डाक्टर के हड़ताल पर चले जाने से ओपीडी में अब प्रोफेसर स्तर के डाक्टर ही सेवाएं दे रहे है। जहां पर मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं और मरीजों को इलाज में परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे पहले रूटीन में रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों को चेक करते थे और उसके बाद ही जांच के लिए आगे भेजते थे. आरडीए के महासचिव डा.अक्षत पुरी का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गौर नहीं करती है तो आगे की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसमें सभी डाक्टर सेवाएं बंद कर सकते है।
