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शिमला : आइजीएमसी अस्पताल शिमला में रेजिडेंट डाक्टर ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। इसके बावजूद मरीजों को डाक्टरों की कमी आने वाले दिनों में झेलनी ही पड़ेगी। 50 फीसद डाक्टर बुधवार से विटर विकेशन पर होंगे। वहीं, सोमवार को राज्य सरकार द्वारा नीट यूजी की काउंसलिग शुरू करने के बाद रेजिडेंट डाक्टरों ने यह हड़ताल वापस ले ली है। सोमवार सुबह से ही डाक्टर हड़ताल में चले गए थे। सुबह वार्ड में रूटीन चेकअप पर भी नहीं गए।

डा. मनोज ने बताया है कि सरकार की ओर से रेजिडेंट डाक्टरों को आश्वासन दिया गया कि काउंसलिग शुरू कर दी गई। यह काउंसलिग केवल हिमाचल में ही शुरू की गई है। अन्य राज्यों में अभी काउंसलिग शुरू नहीं हुई है। इसलिए रेजिडेंट डाक्टरों ने हिमाचल में ही अपनी हड़ताल वापस ली है। आइजीएमसी मे 12 बजे के बाद सभी डाक्टर ड्यूटी पर लौट आए। डाक्‌र्ट्स ने ओपीडी में बैठकर मरीजों का स्वास्थ्य जांचा।

वहीं, आम मरीजों के लिए अभी बुधवार से फिर परेशानी झेलनी पड़ेगी। अस्पताल के आधे डाक्टर विटर विकेशन पर जा रहे हैं।इस दौरान मरीजों को खुद ही देखना होगा कि अस्पताल जिस डाक्टर के पास स्वास्थ्य जांच करवाने जा रहे हैं, वे अस्पताल आये हैं या नहीं।


ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतार
आइजीएमसी में सोमवार को बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। सुबह पर्ची बनाने के लिए की लंबी लाइन लगी रही। रेजिडेंट डाक्टर की हड़ताल होने से सुबह के समय ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी लाइन देखने को मिली। उनको अपनी बारी का इंतजार करने के लिए बहुत समय लग रहा था। ओपीडी में दूसरे डाक्टर मौजूद थे लेकिन इनकी कमी से काफी दिक्कतों सामने आई। मरीजों को ठंड में जमीन पर ही बैठना पड़ा। अस्पताल में स्वास्थ्य जांच करवाने आए दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचे लोग खासे परेशान हुए। अस्पताल में रोजाना 2000 से 3000 के करीब मरीज पहुंचते हैं। आर्थों व मेडिसन ओपीडी में मरीजों की काफी भीड़ देखने को मिली। आइजीएमसी के प्रिसिपल डा. सुरेंद्र सिंह ने माना कि बुधवार से डाक्टरों का एक बैच छुट्टियों पर जाएगा।

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